सुमित के तड़के - SUMIT KE TADKE

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अभी असल तो है बाकी (कविता)

Posted On 1 Oct, 2016 कविता में

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जब 56 इंची सीनों ने

गोलियाँ रायफलों से दागीं

दहशतगर्दों के अब्बू भागे

और अम्मी खौफ से काँपीं

ये तो सिर्फ नमूना था

अभी असल तो है बाकी…

धोखेबाजी और कायरता

जिन दुष्टों के गहने थे

गीदड़ बनकर ढेर हुए

जो खाल शेर की पहने थे

हमपे गुर्रानेवालों की रूहें

हूरों से जा मिलने भागीं

ये तो सिर्फ नमूना था

अभी असल तो है बाकी…

नापाक पडोसी देता धमकी

हमपे एटम बम बरसाने की

जबकि औकात नहीं है उसकी

खुद के बल दो रोटी खाने की

अब जान बचाने की चिंता में

डूबा होगा वो दुश्मन पापी

ये तो सिर्फ नमूना था

अभी असल तो है बाकी…

दुनियावालो तुम ही समझा दो

अब भी वो होश में आ जाए

चरण वंदना कर भारत की

माफ़ी की भीख को ले जाए

वरना क्षणों में मिट जाएगा

दुनिया से मुल्क वो पापी

ये तो सिर्फ नमूना था

अभी असल तो है बाकी…

लेखक : सुमित प्रताप सिंह

http://www.sumitpratapsingh.com/



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shorty के द्वारा
October 17, 2016

I’m intrigued by what you are saying here and I’m looking forward to your future posts on this topic. However, I think the numbers you are giving for the poverty rate under the War on Poverty give the whole picture.According to US Census data, in 1964 the poverty rate was 19%. In 1973, when Nixon took apart the OEO, it stood at 11.1%–it then rose to 13% in 1980. A 7.9% drop during the War on Poverty is pretty significant.I know there must be more to this picture. The other thing I’m wondering is this: If the poverty level was 30% in 1950 and it was already down to 19% in 1964–what caused that? Was it Eihs2eower&#8n17;s investment in infrastructure?

rameshagarwal के द्वारा
October 4, 2016

जय श्री राम सुमित जी देश में इतने गद्दार है की शर्म आती कांग्रेस के कुछ नेता ,केजरीरीवाल और जद(यू) और फ़िल्मी कलाकार इस आपरेशन पर सवाल उठा रहे है सरकार सेना पूरी तैयारी में है मौका मिलते ही आक्रमण होगा देश के गद्दारो की निंदा करनी चाइये.सुन्दर कविता के लिए धन्यवाद्.


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